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शराब एक खतरनाक सामाजिक बुराई

शराब एक ऐसी खतरनाक बुराई है जो बसे बसाये खुशहाल परिवार को भी उजाड़ देती है, तथा धन व बल दोनों का नाश कर देती हैं ।

क्या इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करना चाहिए ??
नशे से इंसान शैतान बन जाता है फिर यह शरीर का नाश कर देता है । शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग फेफड़े, लीवर, गुर्दे, ह्रदय, इन चारों अंगों को खराब कर देता है । शराबी व्यक्ति का शरीर रोगों की खान बन जाता है । जिस कारण से उनके परिवार को उनके नशे और बीमारियों पर खर्च के कारण दोहरी मार पड़ती है ।

नशे के लिए हमारे सद्ग्रन्थों में क्या कहा है ??
संत गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते हैं कि -
सुरापान मध मांसाहारी, गवन करें भोगे पर नारी ।
सत्तर जन्म कटत है शीशम, साक्षी साहिब है जगदीशम ।।
सुरापान व मांस खाने का अंजाम जब इतना बुरा है तो इसे त्यागने में ही भलाई है ।
शराब मानव जीवन बर्बाद करती है । इस बारे में परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं -
भांग, तम्बाकू, छोतरा, आफू और शराब ।
गरीबदास कौन करे बंदगी यह तो करें खराब ।।
शराब भक्ति का नाश करती है । इसे त्यागने में ही भलाई है ।

अगर आप चाहकर भी शराब नही छोड़ पा रहे हैं ??
अगर आप शराब या और किसी भी प्रकार के नशे को नही छोड़ पा रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र से भी आपको सफलता नही मिली है, तो निराश न हो, संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेकर आप इसे बड़ी आसानी से छोड़ सकते हैं ।आप संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन जरूर सुने , जो इस प्रकार है :

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