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Ganesha

भारतीय संस्कृति में देवी देवताओं का बहुत महत्व है । कुल 33 करोड़ देवी देवता है हिन्दू धर्म में । इनमें सबसे पहले गणेश जी को याद किया जाता है । ऐसी मान्यता है कि किसी भी कार्यक्रम, शादी विवाह, या अन्य किसी अनुष्ठान को करने के लिए सबसे पहले गणेश जी को आमंत्रित किया जाता है । गणेश का मतलब भी होता है गणों का ईश यानी भगवान । अब सवाल यह उठता है कि शिव जी के पुत्र गणेश जी से पहले किसकी पूजा की जाती थी ?? वो आदि गणेश कौन है ??  जो अंधे को आंख, कोढ़ी को काया और निर्धन को माया देता है ।  हमारे सभी सद्ग्रन्थों में यही प्रमाण मिलता है कि वो आदि गणेश कविर्देव (कबीर साहेब) ही है । वही असली पापनाशक, मोक्षदायक और अविनाशी भगवान है । उन्ही में सामर्थ्य है कि अंधे को आंख देते हैं, कोढ़ी को माया, और निर्धन को माया देते हैं ।  आज संत रामपाल जी महाराज वही प्रमाणित ज्ञान बता रहे हैं जिसके फलस्वरूप उनके अनुयायियों को अभूतपूर्व लाभ मिल रहे हैं । भयंकर से भयंकर रोग से छुटकारा मिल जाता है । जिसको सन्तान नही है, उन्हें सन्तान सुख की प्राप्ति हो रही है । और सबसे बड़ा मोक्ष की प्राप्ति होती है जिसके लिए ह...

Deepawali Celebration

Since my childhood, I saw many celebrations on deepawali. We enjoyed but we never knew the cause of this celebration. As we grew up, came to know that this festival is celebrated as Shri Ram returned back with Sita Maa after 14 years spending out from his kingdom. After returning to his kingdom, Shri rama expelled Maa Sita from his kingdom due to comment by a washerman. We never regret of it. When we see our holy scriptures, it has clearly mentioned in Holy Gita that, Because of the ignorance, the entire devotee community, by doing worship opposite to the scriptures, is wasting the human life (Holy Shrimad Bhagavad Gita Adhyay 16 Mantra 23-24). Nobody tells about the one God, which we heard from our childhood that God is one and he is capable to change your destiny. Saint Rampal ji Maharaj has given the right spiritual knowledge from our holy Scriptures.

Guru Purnima

वर्तमान समय में व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि यदि वह गुरु धारण करना चाहे तो वह किसे गुरु बनाए ? उसकी सामर्थ्य और शक्ति का मापदंड कैसे निर्धारित किया जाए । वर्तमान में बड़ी संख्या में गुरु विद्यमान हैं और अधिकतर से धोखा ही धोखा है ऐसे हालात में क्या हम एक सच्चे और नेक गुरु को खोज पाएंगे ? कहते हैं कि हर समस्या का समाधान हमकों भगवान ने दिया हुआ है । परमात्मा का दिया समाधान है हमारे सद्ग्रन्थ, तो आइये जानते हैं कि हमारे सद्ग्रन्थों में पूर्ण गुरु की क्या परिभाषा बताई गई है । गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में गीता ज्ञान दाता ने तत्वदर्शी संत (सच्चा सतगुरु) की पहचान बताते हुए कहा है कि वह संत संसार रूपी वृक्ष के प्रत्येक भाग अर्थात जड़ से लेकर पत्ती तक का विस्तारपूर्वक ज्ञान कराएगा । वही पूर्ण संत/गुरु है । उसकी शरण में रहकर भक्ति साधना करने से ही साधक को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती हैं । यजुर्वेद अध्याय 19 के मंत्र 25 व 26 में लिखा है कि वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा। वह तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पू...

Real Knowledge about Christianity

ईसा मसीह परमात्मा के पुत्र थे । पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब ही सबके पिता हैं, उत्पत्ति करता है । वही असली माता पिता भाई बंधु हैं । वह काल की तरह कभी धोखा नहीं देते । ईसा मसीह की मृत्यु के तीसरे दिन स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी आए थे, भक्ति की लाज रखने के लिए अन्यथा काल ब्रह्म भगवान से विश्वास ही उठा देता है लोगों का । पूर्ण परमात्मा जन्म मृत्यु से परे है, वह ना तो मां के गर्भ से जन्म लेता है ना ही उसकी मृत्यु होती है । ईसा मसीह जैसी पवित्र आत्मा की भी दर्दनाक मृत्यु हुई, फिर आम इंसान का कैसे बच सकता है । केवल पूर्ण परमात्मा कबीर जी ही अविनाशी हैं, मोक्षदायक प्रभु हैं ।

True Spiritual Knowledge

भारतीय संस्कृति बहुत पुरातन है और इसमें गुरु बनाने की परंपरा भी बहुत पुरानी रही है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक गुरु अवश्य बनाता है ताकि गुरु उनके जीवन को नई सकारात्मक दिशा दिखा सके। जिस पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल व सुखमय बना सके एवं मोक्ष प्राप्त कर सके। वर्तमान में व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि यदि वह गुरु धारण करना चाहे तो वह किसे गुरु बनाए? उसकी सामर्थ्य और शक्ति का मापदंड कैसे निर्धारित किया जाए । वर्तमान में बड़ी संख्या में गुरु विद्यमान हैं और अधिकतर से धोखा ही धोखा है ऐसे हालात में क्या हम एक सच्चे और नेक गुरु को खोज पाएंगे? आज पूरे विश्व में धर्म गुरुओं व संतों की बाढ़ सी आई हुई है । मुमुक्षु को समझ में नहीं आता है कि सच्चा (अधिकारी) सतगुरु कौन है जिनसे नाम दीक्षा लेने से उसका मोक्ष संभव हो सकता है? वेदों, श्रीमद्भगवद गीता आदि पवित्र सद्ग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तथा नकली संतों, महंतों और गुरुओं द्वारा भक्ति मार्ग के स्वरूप को बिगाड़ दिया गया होता है। तब परमेश्वर स्वंय आकर या अपने परम ज्ञान...

Kabir Prakat Diwas Not Jayanti

Lord Kabir Himself appears on earth, that is why, Prakat Diwas has celebrated for him and not Jayanti. Lord Kabir's body is not made up of five elements and doesn't have any bones or flesh. His body is composed of a "Single element of divine light". No other God except Almighty Lord Kabir, is free from the cycle of birth and death. Kabir Prakat Diwas is celebrated only for the Indestructible God, whose name is God Kabir, because he doesn't take birth.

DeepKnowlegde_Of_GodKabir

Lord Kabir, in order to wake up the souls, who are in deep slumber of spiritual ignorance, tells that, human life is extremely precious. Lord Kabir was the very first Saint, who made all the souls know about "Satlok" which is the"ever happy abode", devoid of any pain and sorrow. Lord Kabir, while describing the glory of Satlok, has told that there is a place where the body is not made of five elements but is composed of a "single element of devine light". God Kabir has unveiled many of the intense secrets by telling that, He was the one who increased the length of Draupadi's saree and He, himself killed Hiranyakashipu and kans, to maintain the glory of worship and to keep faith.

#DivinePlay_Of_GodKabir

Kabir Saheb is Supreme God. He comes in every age and meet his good souls and given him True Spiritual Knowledge. God Kabir came in the form of Rishi Maninder and shown the true path of worship to Hanuman Ji. Lord Kabir took Mira bai in his refuge and given the true mantras for salvation. Watch Sadhna TV at 7:30 to 8:30 pm daily

52_Cruelities_On_GodKabir

परमात्मा कबीर साहेब को 52 कसनी दी गयी अर्थात उन्हें 52 बार मरवाने की कोशिश की गयी पर परमात्मा को कोई हानि नहीं पहुंची क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब अजर अमर अविनाशी हैं। कबीर परमात्मा को ख़त्म करने के लिए हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बहुत से प्रयास किये। ऐसे ही एक बार सिकंदर लोधी ने कबीर साहेब को हाथी से कुचलवाने की सजा दी। कबीर परमात्मा जी के हाथ पाँव बांध कर उन्हें एक मदोन्मत खूनी हाथी के आगे डाल दिया गया। कबीर परमात्मा को मारने के लिए आगे बढ़ा तो उसे परमात्मा के स्थान पर एक बब्बर शेर दिखाई दिया। सिकंदर लोधी को भी परमात्मा का विराट रूप दिखाई दिया। हाथी अपनी जान बचा कर भाग गया तथा राजा भी थर्र थर्र काँपता हुआ नीचे आया और कबीर परमेश्वर को दंडवत प्रणाम किया।

MagharLeela_Of_GodKabir

After spending 120 years with us, our Supreme Father God Kabir Saheb Ji decided to end His Leela of being a human and go back to His Kingdom Satlok. At that time, the ignorant Hindu Brahmins had spread a rumor that those who die in Maghar (a place in Uttar Pradesh) go to hell, and those who die in Kashi go straight to heaven. God Kabir Ji lied on the sheet and covered Himself up with another. After a while, God Kabir Ji said through an Ethervoice, “Look Brahmins, Pundits! I’m departing with My Body from Maghar. Check your books to figure out where I am going — if I’m going in hell or even above heaven?” The Brahmins checked their books and said, “Really. All the Sanskaar changed. When the sheets were lifted, they found fragrant flowers in place and in Form of God Kabir’s Body. On seeing this, both Hindus and Muslims cried hugging each other as children cry on the death of their father.

भक्ति का सही स्वरूप

वेदों, श्रीमद्भगवदगीता आदि पवित्र सद्ग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तथा नकली संतों, महंतों और गुरुओं द्वारा भक्ति मार्ग के स्वरूप को बिगाड़ दिया गया होता है। तब परमेश्वर स्वंय आकर या अपने परम ज्ञानी संत को भेजकर सच्चे ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनः स्थापना करते हैं और भक्ति मार्ग को शास्त्रों के अनुसार समझाकर भगवान प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त करते हैं। परमात्मा कौन है ?? सर्वशक्तिशाली परमात्मा कबीर साहेब अपने साधक के हर संकट को क्षण में दूर कर देता है । इसका प्रमाण हमारे सद्ग्रन्थों में विधमान है । ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 16 मंत्र 18 “ऋषिमना य ऋषिकृत् स्वर्षाः सहत्राणीथः पदवीः कवीनाम्। तृतीयम् धाम महिषः सिषा सन्त् सोमः विराजमानु राजति स्टुप्।। अनुवाद:  वेद बोलने वाला ब्रह्म कह रहा है कि (य) जो पूर्ण परमात्मा विलक्षण बच्चे के रूप में आकर (कवीनाम्) प्रसिद्ध कवियों की (पदवीः) उपाधी प्राप्त करके अर्थात् एक संत या ऋषि की भूमिका करता है उस (ऋषिकृत्) संत रूप में प्रकट हुए प्रभु द्वारा रची गईं (सहत्राणीथः) हजारों वाणी (ऋषिमना) संत...