भारतीय संस्कृति में देवी देवताओं का बहुत महत्व है । कुल 33 करोड़ देवी देवता है हिन्दू धर्म में । इनमें सबसे पहले गणेश जी को याद किया जाता है । ऐसी मान्यता है कि किसी भी कार्यक्रम, शादी विवाह, या अन्य किसी अनुष्ठान को करने के लिए सबसे पहले गणेश जी को आमंत्रित किया जाता है । गणेश का मतलब भी होता है गणों का ईश यानी भगवान । अब सवाल यह उठता है कि शिव जी के पुत्र गणेश जी से पहले किसकी पूजा की जाती थी ?? वो आदि गणेश कौन है ?? जो अंधे को आंख, कोढ़ी को काया और निर्धन को माया देता है । हमारे सभी सद्ग्रन्थों में यही प्रमाण मिलता है कि वो आदि गणेश कविर्देव (कबीर साहेब) ही है । वही असली पापनाशक, मोक्षदायक और अविनाशी भगवान है । उन्ही में सामर्थ्य है कि अंधे को आंख देते हैं, कोढ़ी को माया, और निर्धन को माया देते हैं । आज संत रामपाल जी महाराज वही प्रमाणित ज्ञान बता रहे हैं जिसके फलस्वरूप उनके अनुयायियों को अभूतपूर्व लाभ मिल रहे हैं । भयंकर से भयंकर रोग से छुटकारा मिल जाता है । जिसको सन्तान नही है, उन्हें सन्तान सुख की प्राप्ति हो रही है । और सबसे बड़ा मोक्ष की प्राप्ति होती है जिसके लिए ह...
मनुष्य जीवन कहते हैं कि 84 लाख योनियों के बाद मिलता है । सुनने में थोड़ा अजीब लगता है किन्तु है एकदम सत्य । 84 लाख योनियां यानी जो जीव हमको दृश्य रूप में दिखाई देते है, और न जाने कितने जीव है जो हम अपनी आंखों से नही देख पाते । मनुष्य जीवन में भी कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है, जबकि मनुष्य बहुत कुछ करने में सक्षम है । सोचिए 84 लाख योनियों में कितना कष्ट इस जीव को झेलना पड़ता है । मनुष्य जीवन में हम बोल कर बता सकते हैं कि हमको सिर में दर्द है, पेट में दर्द है, भूख लगी है आदि । पर 84 लाख योनियों में कोई भी जीव बोल न ही सकता - कितना दुःखद परन्तु सत्य । अब बात आती है कि आखिर हम ये कष्ट क्यों भोग रहे हैं । आखिर क्यों हमको न चाहते हुए भी 84 लाख योनियों में कष्ट उठाना पड़ता है ?? कारण क्या है ?? जब हम अपने आध्यात्मिक संविधान यानी हमारे सद्ग्रन्थों को उठाकर देखते हैं तो पता चलता है कि मनुष्य जीवन हमको परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिलता है और अगर हम इसका सही उपयोग नही करते तो हमको मनुष्य जीवन के साथ 84 लाख योनियों में भी कष्ट उठना पड़ता है । आज पूरे विश्व में एकमात्र संत रामपाल जी महाराज है ज...